Scientific Cultivation of Sponge Gourd (Torai) : नेनुआ (Sponge Gourd / घिया तोरई) भारत में उगाई जाने वाली एक प्रमुख कद्दूवर्गीय (Cucurbit) सब्जी है। कम लागत और लंबे समय तक लगातार फल देने के कारण यह किसानों के लिए नकदी फसल का बेहतरीन जरिया है। नीचे किसानों द्वारा सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले प्रश्नों के आधार पर खेती का संपूर्ण विवरण दिया गया है।
नेनुआ की खेती किस महीने में की जाती है? (Sowing Time)
किसान सबसे ज्यादा इसकी बुआई का सही समय तलाशते हैं। नेनुआ साल में दो बार मुख्य रूप से लगाया जाता है गर्मी/जायद फसल 15 फरवरी से 31 मार्च के बीच बुआई करें। इस समय बोने पर अप्रैल-मई में जब सब्जियों के दाम ऊंचे होते हैं, तब पैदावार मिलती है। बरसात/खरीफ फसल15 जून से जुलाई के अंत तक। यह समय मानसून की पहली बारिश के साथ सबसे मुफीद होता है।
नेनुआ की सबसे अच्छी हाइब्रिड वैरायटी कौन सी है? (Best Varieties)
अच्छी पैदावार के लिए सही बीज का चुनाव 50% सफलता तय कर देता है। बाजार में सबसे ज्यादा खोजी जाने वाली किस्में सरकारी एवं शोध संस्थान किस्में , पूसा चिकनी गहरे हरे, मध्यम आकार के फल, गर्मी और बरसात दोनों के लिए उत्तम, काशी दिव्या: कम समय में अधिक फल देने वाली रोगरोधी किस्म, पूसा स्नेहा फल चिकने, सीधे और मंडियों में अच्छी कीमत पाने वाले।प्राइवेट हाइब्रिड किस्में सिंजेंटा (Syngenta – आलोक / Alok), महिको, एडवांटा और ईस्ट-वेस्ट सीड्स की किस्में, जिनकी फलत बहुत घनी होती है। बीज दर: 1.5 से 2 किलोग्राम प्रति एकड़।
नेनुआ का बीज कैसे उगाएं? (Seed Treatment & Germination)
अक्सर किसानों की शिकायत रहती है कि बीज देर से उगते हैं या सड़ जाते हैं। इसके लिए बीजों का छिलका कड़ा होता है, इसलिए बुआई से पहले उन्हें 12 से 24 घंटे हल्के गुनगुने पानी में भिगोकर रखें। इसके बाद ट्राइकोडर्मा (5 ग्राम/किग्रा) या कार्बेन्डाजिम (2 ग्राम/किग्रा) से बीज उपचारित करें ताकि फफूंद न लगे। बीजों को 2 से 2.5 सेंटीमीटर की गहराई पर ही दबाएं।
नेनुआ की मचान विधि क्या है और इसके क्या फायदे हैं? (Trellis Method)
सर्च ट्रेंड्स में मचान विधि (Trellis Farming) सबसे लोकप्रिय विषय है। बांस के खंभे और जीआई तार (GI Wire) या प्लास्टिक की जाली लगाकर 6 से 7 फीट ऊंचा ढांचा तैयार किया जाता है। जब पौधे 15-20 सेमी के हों, तो सुतली की मदद से बेल को मचान पर चढ़ा दिया जाता है।
फायदे
फल जमीन पर न लटकने से सड़ते नहीं हैं और बिल्कुल सीधे व चमकदार बनते हैं। कीट और फंगस का प्रकोप 60% तक कम हो जाता है। सामान्य जमीन वाली खेती के मुकाबले पैदावार 30% से 40% तक बढ़ जाती है।
नेनुआ में फल-फूल बढ़ाने की दवा (How to Increase Yield & Female Flowers)
नेनुआ में कई बार केवल नर फूल आते हैं और फल नहीं बनते या फूल झड़ जाते हैं। इसके उपाय:
शाखाओं की कटाई (3G Cutting): मुख्य तने को 7-8 पत्तों के बाद ऊपर से चुटकी से काट दें (Pinching)। इससे साइड से द्वितीयक और तृतीयक शाखाएं निकलेंगी, जिन पर मादा फूल (फल वाले फूल) ज्यादा आते हैं।
फूल झड़ना रोकने के लिए: जब फूल आने शुरू हों, तब अल्फा नैफ्थाइल एसिटिक एसिड (जैसे Planofix – 1 मिली प्रति 4.5 लीटर पानी) का हल्का छिड़काव करें। पोषक तत्व सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) और बोरॉन (1 ग्राम प्रति लीटर) का छिड़काव करने से फल का आकार सुडौल रहता है और फल गिरते नहीं हैं। नेनुआ के प्रमुख रोग और घरेलू/रासायनिक उपचार (Pest & Disease Control)
फल मक्खी (Fruit Fly): यह फल में डंक मारकर कीड़े पैदा करती है जिससे फल टेढ़ा होकर सड़ जाता है।
उपाय प्रति एकड़ 6 से 8 फेरोमोन ट्रैप (Pheromone Traps) लगाएं।
लाल कीड़ा (Red Pumpkin Beetle): शुरुआती पत्तियों को छलनी कर देता है। उपाय: नीम का तेल (Neem Oil 1500 ppm – 3-4 मिली/लीटर) छिड़कें या इमिडाक्लोप्रिड का हल्का स्प्रे करें।पत्तियों का पीला पड़ना / डाउनी मिल्ड्यू उपाय: मैंकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (2-2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर 10 दिन के अंतर पर छिड़कें।
एकड़ नेनुआ से कितनी कमाई और पैदावार होती है? (Profit & Cost Analysis)
पैदावार मचान विधि और हाइब्रिड बीज से प्रति एकड़ 70 से 90 क्विंटल तक कुल उत्पादन मिलता है। तुड़ाई: बुआई के 50-55 दिन बाद शुरू होकर अगले 60-70 दिनों तक हर तीसरे दिन तुड़ाई चलती है। खर्च: खेत की तैयारी, मचान ढांचा, बीज, खाद व कीटनाशक मिलाकर लगभग ₹30,000 से ₹45,000 प्रति एकड़ खर्च आता है।
शुद्ध मुनाफा: यदि औसतन ₹20 से ₹30 प्रति किलो का थोक भाव भी मिले, तो 1 एकड़ से ₹1.5 लाख से ₹2 लाख तक का सकल राजस्व बनता है, जिसमें से सभी खर्च काटकर ₹1 लाख से ₹1.5 लाख तक शुद्ध बचत आसानी से हो सकती है।
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